माता पार्वती चित्रकेतु को दंड देने में उचित थीं, क्योंकि चित्रकेतु ने महादेव नामक सर्वोच्च पिता की झूठी आलोचना की थी, जो इस भौतिक संसार में स्थित जीवों के पिता हैं। देवी दुर्गा को माता कहा जाता है, और भगवान शिव को पिता कहा जाता है। एक शुद्ध वैष्णव को दूसरों की आलोचना किए बिना अपने विशिष्ट कर्तव्य में संलग्न होने के लिए बहुत सावधान रहना चाहिए। यह सबसे सुरक्षित स्थिति है। अन्यथा, यदि कोई दूसरों की आलोचना करने जाता है, तो वह वैष्णव की आलोचना करने का महान अपराध कर सकता है।
क्योंकि चित्रकेतु निस्संदेह एक वैष्णव था, वह आश्चर्यचकित हो सकता है कि पार्वती ने उसे शाप दिया था। इसलिए देवी पार्वती ने उसे पुत्र या पुत्र के रूप में संबोधित किया। हर कोई माता दुर्गा का पुत्र है, लेकिन वह एक साधारण माँ नहीं हैं। जैसे ही राक्षस के व्यवहार में थोड़ी सी भी विसंगति होती है, माता दुर्गा राक्षस को तुरंत दंडित करती हैं ताकि वह अपने होश में आ सके। इसकी व्याख्या भगवान कृष्ण ने भगवद्-गीता (7.14) में की है:
"दैवी ह्येषा गुण-मयी
माम माया दुर्त्यया
माम एव ये प्रपद्यन्ते
मायाम् एतां तरन्ति ते
"वस्तु प्रकृति के तीनों गुणों से युक्त मेरी यह दिव्य ऊर्जा को पार करना कठिन है। लेकिन जो लोगने मेरा शरणागत ग्रहण कर लिया है, वे आसानी से उससे परे निकल सकते हैं।" कृष्ण के प्रति समर्पण करने का अर्थ उनके भक्तों के प्रति समर्पण भी करना है, क्योंकि कोई भी कृष्ण का सही सेवक नहीं हो सकता जब तक कि वह भक्त का सही सेवक न हो। चाडिया वैष्णव-सेवा निस्तार पाएचे केबा: कृष्ण के सेवक की सेवा किए बिना, कृष्ण के खुद के सेवक पद पर नहीं पहुँचा जा सकता। इसलिए माता पार्वती ने चित्रकेतु से ठीक उसी तरह बात की जैसे एक माँ अपने शरारती बच्चे से कहती है, "मेरे बच्चे, मैं तुम्हें इसलिए दंडित कर रही हूँ ताकि तुम फिर से ऐसा कुछ न करो।" अपनी संतान को दंडित करने की यह प्रवृत्ति माता यशोदा में भी पाई जाती है, जो भगवान की सर्वोच्च व्यक्तित्व की माता बनीं। माता यशोदा ने कृष्ण को बाँधकर और उन्हें छड़ी दिखाकर दंडित किया। इस प्रकार माता का कर्तव्य है कि वह अपने प्रिय पुत्र को दंडित करे, यहाँ तक कि भगवान के मामले में भी। यह समझना होगा कि माता दुर्गा चित्रकेतु को दंडित करने में उचित थीं। यह सजा चित्रकेतु के लिए एक वरदान थी क्योंकि राक्षस वृत्रासुर के रूप में जन्म लेने के बाद उसे सीधे वैकुंठ में पदोन्नत कर दिया गया था।
