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bhagavat 6.16.49: शुकदेव गोस्वामी जी ने कहा- हे कुरुवंश के शिरोमणि महाराज परीक्षित जी! विद्याधरों के राजा चित्रकेतु द्वारा की गई स्तुति से अत्यधिक प्रसन्न होकर भगवान अनन्तदेव ने निम्नलिखित उत्तर दिया।   |   bhagavat अध्याय 6.16: राजा चित्रकेतु की परमेश्वर से भेंट   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 16: राजा चित्रकेतु की परमेश्वर से भेंट  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  6.16.49 
श्रीशुक उवाच
संस्तुतो भगवानेवमनन्तस्तमभाषत ।
विद्याधरपतिं प्रीतश्चित्रकेतुं कुरूद्वह ॥ ४९ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी जी ने कहा- हे कुरुवंश के शिरोमणि महाराज परीक्षित जी! विद्याधरों के राजा चित्रकेतु द्वारा की गई स्तुति से अत्यधिक प्रसन्न होकर भगवान अनन्तदेव ने निम्नलिखित उत्तर दिया।
 
Sukadeva Goswami further said: O best of the Kuru dynasty, Maharaja Pariksit! Extremely pleased with the praise offered by Citraketu, the King of the Vidyadharas, Lord Anantadev replied as follows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)