हे प्रभु! आप इस ब्रह्मांड के निर्माता, पालनहार और संहारक हैं, लेकिन जो लोग बहुत भौतिकवादी हैं और हमेशा पृथकता देखते हैं, उनके पास ऐसी आँखें नहीं हैं जिससे वे आपको देख सकें। वे आपकी वास्तविक स्थिति को नहीं समझ सकते हैं, और इसलिए वे निष्कर्ष निकालते हैं कि ब्रह्मांड आपके ऐश्वर्य से स्वतंत्र है। हे प्रभु! आप परम पवित्र हैं और आप सभी छह ऐश्वर्यों से पूर्ण हैं। इसलिए मैं आपको सादर प्रणाम करता हूँ।
O Lord! You are the creator, preserver and destroyer of this cosmic manifestation, but the extremely worldly and discriminatory people do not have the eyes to see You. Not understanding Your real position, they conclude that this cosmic manifestation is independent of Your opulence. O Lord! You are absolutely pure and are imbued with all the six opulences. Therefore, I offer my respectful obeisances unto You.
तात्पर्य
नास्तिक पुरुष समझते हैं कि ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति संयोगवश हुई है, पदार्थों के संयोग से, ईश्वर के संबंध के बिना। भौतिकवादी कथित रसायनज्ञ और नास्तिक दार्शनिक हमेशा ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति के संबंध में ईश्वर के नाम से भी बचना चाहते हैं। उनके लिए ईश्वर की रचना को समझना असंभव है क्योंकि वे बहुत भौतिकवादी हैं। भगवान परमात्मा परमहंस हैं, या सर्वोच्च शुद्ध हैं, जबकि जो पापी हैं, भौतिक इंद्रिय सुख से बहुत अधिक जुड़े हुए हैं और इसलिए गधों जैसे भौतिक कार्यों में लगे हुए हैं, वे मनुष्यों में सबसे नीच हैं। उनका सारा तथाकथित वैज्ञानिक ज्ञान उनके नास्तिक स्वभाव के कारण शून्य और शून्य है। इस प्रकार वे भगवान परमात्मा को समझ नहीं सकते।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥