इसलिए हे भगवान, केवल आपको देखने से ही मेरे सभी पापों का दूषित प्रभाव और भौतिक लगाव और वासनाओं का फल, जिससे मेरा मन और हृदय हमेशा परिपूर्ण रहता था, हमेशा के लिए धुल गए हैं। जो कुछ महान संत नारद मुनि ने भविष्यवाणी की थी, वह अन्यथा नहीं हो सकता। दूसरे शब्दों में, नारद मुनि द्वारा प्रशिक्षित किए जाने के कारण ही मुझे आपके दर्शन प्राप्त हुए हैं।
Therefore, O Lord! Just seeing you has forever washed away the stains of all my sins and the results of material attachment and lustful objects with which my mind and inner being were filled. Whatever Narada Muni has predicted cannot be otherwise. In other words, it is only because of being taught by Narada Muni that I have been able to attain your proximity.
तात्पर्य
यह सम्पूर्ण मार्ग की प्रक्रिया है। व्यक्ति को नारद, व्यास और असित जैसे अधिकारियों से सीखना चाहिए और उनके सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। फिर व्यक्ति अपनी आँखों से भी भगवान के परम व्यक्तित्व को देख सकेगा। केवल प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। अतः श्री-कृष्ण-नामादि न भवेद् ग्राह्यमिन्द्रियैः। हमारे कुंठित आँखों और अन्य इंद्रियों से हम भगवान के परम व्यक्तित्व को नहीं देख सकते हैं, लेकिन अगर हम अपने इन्द्रियों को अधिकारियों के निर्देशानुसार भगवान की सेवा में लगाते हैं, तो उसे देखना सम्भव होगा। जैसे ही कोई भगवान के परम व्यक्तित्व को देखता है, निश्चित रूप से उसके हृदय कोर में सभी पापी प्रतिक्रियाएँ समाप्त हो जाती हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥