Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.16.30: भगवान् शेष की शरण में पहुँचकर चित्रकेतु ने देखा कि वे कमल-पुष्प के श्वेत तंतुओं के समान श्वेत वर्ण के थे। वे नीले वस्त्रों में सजे थे और शानदार ढंग से चमचमाते मुकुट, बाजूबंद, करधनी और कंगन से सुशोभित थे। उनका चेहरा मुस्कुरा रहा था और उनकी आँखें लाल थीं। वे सनत-कुमार जैसे महान मुक्त पुरुषों से घिरे हुए थे। | bhagavat अध्याय 6.16: राजा चित्रकेतु की परमेश्वर से भेंट । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भगवान् शेष की शरण में पहुँचकर चित्रकेतु ने देखा कि वे कमल-पुष्प के श्वेत तंतुओं के समान श्वेत वर्ण के थे। वे नीले वस्त्रों में सजे थे और शानदार ढंग से चमचमाते मुकुट, बाजूबंद, करधनी और कंगन से सुशोभित थे। उनका चेहरा मुस्कुरा रहा था और उनकी आँखें लाल थीं। वे सनत-कुमार जैसे महान मुक्त पुरुषों से घिरे हुए थे।
On reaching the shelter of Lord Shesha, Chitraketu saw that he was as white as the white fibres of a lotus flower. He was wearing blue clothes and was adorned with a glittering crown, armlets, belt and bracelets. His face was filled with a soft smile. His eyes were red. He was surrounded by liberated men like Sanatkumara.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥