हे वैकुण्ठलोक में आसीन परम तत्व! आपकी दो कमल जैसी चरणकमलों पर श्रेष्ठ भक्तों के कई समूह हमेशा अपने कमल-कली जैसे हाथों से मालिश करते हैं। आप पूर्ण छह ऐश्वर्यों के साथ श्रीभगवान हैं। आप पुरुषसूक्त की स्तुतियों में वर्णित परम पुरुष हैं। आप परम पूर्ण हैं, स्वयं-साक्षात्कृत समस्त योग-शक्तियों के स्वामी हैं। मैं आपको अपने आदरपूर्ण प्रणाम अर्पित करता हूं।
O divine Lord seated in Vaikunthaloka! Your feet are always being touched by the hands of the best devotees. You are the Supreme Lord, endowed with the six opulences. You are the Supreme Person described in the hymns of the Purushasukta. You are the most perfect, the embodiment of all yogic powers. I offer my respectful obeisances unto You.
तात्पर्य
ऐसा कहा जाता है कि परम सत्य एक है, लेकिन वह ब्रह्म, परमात्मा और भगवान के रूप में विभिन्न रूपों में प्रकट होता है। पिछले श्लोकों में परम सत्य के ब्रह्म और परमात्मा रूपों का वर्णन किया गया है। अब यह प्रार्थना भक्ति-योग में परम सर्वोच्च व्यक्ति को समर्पित है। इस संबंध में प्रयुक्त शब्द सकल-सात्वत-परिवृढ़ हैं। सात्वत शब्द का अर्थ है "भक्त" और सकल का अर्थ है "सभी एक साथ"। भक्त, जिनके भी कमल चरण हैं, कमल हाथों से भगवान के कमल चरणों की सेवा करते हैं। भक्त कभी-कभी भगवान के कमल चरणों की सेवा करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं, और इसलिए भगवान को परम-परमेष्ठिन के रूप में संबोधित किया जाता है। वह सर्वोच्च व्यक्ति है, फिर भी वह भक्तों के प्रति बहुत दयालु है। कोई भी भगवान की सेवा करने के लिए सक्षम नहीं है, लेकिन भले ही एक भक्त सक्षम न हो, दयालु प्रभु भक्त के विनम्र प्रयास को स्वीकार करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥