श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 15: नारद तथा अंगिरा ऋषियों द्वारा राजा चित्रकेतु को उपदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.15.7 
देहेन देहिनो राजन् देहाद्देहोऽभिजायते ।
बीजादेव यथा बीजं देह्यर्थ इव शाश्वत: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
जैसे एक बीज से दूसरा बीज पैदा होता है, हे राजा, उसी प्रकार एक शरीर (पिता का शरीर) से, दूसरे शरीर (माता का शरीर) के द्वारा, एक तीसरा शरीर (पुत्र का शरीर) उत्पन्न होता है। जैसे भौतिक शरीर के तत्व शाश्वत हैं, वैसे ही इन भौतिक तत्वों से प्रकट होने वाला जीव भी शाश्वत है।
 
O King! Just as one seed gives rise to another seed, similarly a third body (of the son) is born from one body (the father's body) through another body (the mother's). Just as the elements of the physical body are eternal, so too the soul that emerges from these physical elements is eternal.
तात्पर्य
भगवद् गीता हमें समझाती है कि दो उर्जा हैं, श्रेष्ठ ऊर्जा और निम्न ऊर्जा। निम्न ऊर्जा में पाँच स्थूल और तीन सूक्ष्म भौतिक तत्व होते हैं। जीव जो श्रेष्ठ ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है, भौतिक उर्जा के संचालन या निगरानी के माध्यम से इन तत्वों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के शरीर में प्रकट होता है। वास्तव में आध्यात्मिक और भौतिक उर्जा - पदार्थ और आत्मा - भगवान के व्यक्तित्व के गुण के रूप में शाश्वत रूप से मौजूद हैं। शक्तिशाली इकाई सर्वोच्च व्यक्ति है। चूँकि आध्यात्मिक ऊर्जा, जीव, जो भगवान का अभिन्न अंग है, इस भौतिक दुनिया का आनंद लेना चाहता है, इसलिए भगवान उसे विभिन्न प्रकार के भौतिक शरीरों को स्वीकार करने और विभिन्न भौतिक परिस्थितियों में आनंद लेने या दुखी होने का मौका देते हैं। वास्तव में, आध्यात्मिक ऊर्जा, जीव जो भौतिक चीजों का आनंद लेना चाहता है, को भगवान द्वारा संचालित किया जाता है। कथित पिता और माता का जीव से कोई लेना-देना नहीं है। अपनी खुद की पसंद और कर्म के परिणामस्वरूप, जीव कथित पिता और माता की एजेंसी के माध्यम से अलग अलग शरीर लेता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)