Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.15.28: हे राजन! प्राचीन समय में भगवान शिव एवं अन्य देवताओं ने संकर्षण के चरणों का आश्रय लिया था। इस प्रकार वे द्वैतबुद्धि के मोह से तुरंत मुक्त हो गए और उन्होंने आध्यात्मिक जीवन में अद्वितीय एवं असाध्य यश प्राप्त किया। तुम भी शीघ्र ही ठीक वैसा ही पद प्राप्त करोगे। | bhagavat अध्याय 6.15: नारद तथा अंगिरा ऋषियों द्वारा राजा चित्रकेतु को उपदेश । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत्पादमूलमुपसृत्य नरेन्द्र पूर्वे
शर्वादयो भ्रममिमं द्वितयं विसृज्य ।
सद्यस्तदीयमतुलानधिकं महित्वं
प्रापुर्भवानपि परं न चिरादुपैति ॥ २८ ॥
अनुवाद
हे राजन! प्राचीन समय में भगवान शिव एवं अन्य देवताओं ने संकर्षण के चरणों का आश्रय लिया था। इस प्रकार वे द्वैतबुद्धि के मोह से तुरंत मुक्त हो गए और उन्होंने आध्यात्मिक जीवन में अद्वितीय एवं असाध्य यश प्राप्त किया। तुम भी शीघ्र ही ठीक वैसा ही पद प्राप्त करोगे।
O King! In ancient times, Lord Shiva and other demigods took refuge in the lotus feet of Sankarshana. Thus, they were instantly freed from the delusion of duality and attained unparalleled and insurmountable glory in spiritual life. You will soon attain the same position.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध छह के अंतर्गत पंद्रहवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥