श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 15: नारद तथा अंगिरा ऋषियों द्वारा राजा चित्रकेतु को उपदेश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.15.27 
श्रीनारद उवाच
एतां मन्त्रोपनिषदं प्रतीच्छ प्रयतो मम ।
यां धारयन् सप्तरात्राद् द्रष्टा सङ्कर्षणं विभुम् ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
महान ऋषि नारद ने आगे कहा—हे राजन! तुम एकाग्रचित्त होकर मुझसे अत्यंत शुभ मंत्र ग्रहण करो। इसे स्वीकार कर लेने के बाद सात रातों में ही तुम साक्षात् भगवान का दर्शन कर सकोगे।
 
महान ऋषि नारद ने आगे कहा—हे राजन! तुम एकाग्रचित्त होकर मुझसे अत्यंत शुभ मंत्र ग्रहण करो। इसे स्वीकार कर लेने के बाद सात रातों में ही तुम साक्षात् भगवान का दर्शन कर सकोगे।
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