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bhagavat 6.14.61: जब महान ऋषि अंगिरा ने समझ लिया कि राजा शोक के सागर में लगभग मृत हो चुका है, तो वे नारद ऋषि के साथ वहाँ गए।   |   bhagavat अध्याय 6.14: राजा चित्रकेतु का शोक   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 14: राजा चित्रकेतु का शोक  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  6.14.61 
एवं कश्मलमापन्नं नष्टसंज्ञमनायकम् ।
ज्ञात्वाङ्गिरा नाम ऋषिराजगाम सनारद: ॥ ६१ ॥
 
 
अनुवाद
जब महान ऋषि अंगिरा ने समझ लिया कि राजा शोक के सागर में लगभग मृत हो चुका है, तो वे नारद ऋषि के साथ वहाँ गए।
 
When Sage Angira realized that the king was almost dead in the ocean of grief, he went there along with Sage Narada.
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध छह के अंतर्गत चौदहवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)