अरे विधाता, अरे सृष्टिकर्ता! निश्चय ही तू अपने सृष्टि-कार्य में भोला है। पिता के होते हुए तूने उसके पुत्र को मरवा दिया और इस तरह से अपने ही सृष्टि के नियमों के विपरीत कार्य कर डाला है। यदि तू नियमभंग करने पर ही उतारू है, तो तू निश्चय ही समस्त जीवात्माओं का शत्रु है और निर्दयी है।
O God, O Creator! You are certainly inexperienced in your work of creation because you allowed the death of the son of the father while he was alive and thus acted against the rules of your own creation. If you are bent on breaking the rules, then you are certainly the enemy of all living beings and are ruthless.
तात्पर्य
यह वही तरीका है जिसमें एक बद्ध जीव परम सृष्टिकर्ता की निंदा करता है जब उसे असफलता मिलती है। कभी-कभी वह भगवान को कुटिल होने का आरोप लगाता है क्योंकि कुछ लोग सुखी होते हैं और कुछ नहीं होते। यहाँ रानी परम प्रोविडेंस को अपने पुत्र की मृत्यु के लिए दोष देती है। रचनात्मक कानूनों का पालन करते हुए एक पिता को पहले मरना चाहिए और फिर उसके बेटे को। यदि प्रोविडेंस की सनक के अनुसार रचनात्मक कानून बदल जाते हैं, तो निश्चित रूप से प्रोविडेंस को दयालु नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि सृजित प्राणी के लिए हानिकारक माना जाना चाहिए। दरअसल निर्माता नहीं बल्कि बद्ध जीव ही अनुभवहीन है। वह नहीं जानता कि फलदायक गतिविधि के सूक्ष्म नियम कैसे काम करते हैं, और प्रकृति के इन नियमों के ज्ञान के बिना, वह अज्ञानतावश भगवान की आलोचना करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥