Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.14.50-51: जब राजा चित्रकेतु ने यह सुना कि किसी अज्ञात कारण से उनके पुत्र की मृत्यु हो गई है, तो वह लगभग अंधे हो गए और अपने पुत्र के प्रति असीम स्नेह के कारण उनके विलाप का आग की तरह दहककर बढ़ता गया। मृत बालक को देखने के लिए चलते हुए वह जमीन पर बार-बार फिसलते और गिरते जा रहे थे। अपने मंत्रियों, अन्य अधिकारियों और विद्वान ब्राह्मणों से घिरे हुए राजा बालक के पास पहुँचे और उसके चरणों में बेहोश होकर गिर पड़े। उनके बाल और कपड़े बिखरे हुए थे। जब राजा को होश आया, तो उनकी आँखें आँसुओं से भरी थीं और वह कुछ बोल नहीं पा रहे थे। | bhagavat अध्याय 6.14: राजा चित्रकेतु का शोक । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब राजा चित्रकेतु ने यह सुना कि किसी अज्ञात कारण से उनके पुत्र की मृत्यु हो गई है, तो वह लगभग अंधे हो गए और अपने पुत्र के प्रति असीम स्नेह के कारण उनके विलाप का आग की तरह दहककर बढ़ता गया। मृत बालक को देखने के लिए चलते हुए वह जमीन पर बार-बार फिसलते और गिरते जा रहे थे। अपने मंत्रियों, अन्य अधिकारियों और विद्वान ब्राह्मणों से घिरे हुए राजा बालक के पास पहुँचे और उसके चरणों में बेहोश होकर गिर पड़े। उनके बाल और कपड़े बिखरे हुए थे। जब राजा को होश आया, तो उनकी आँखें आँसुओं से भरी थीं और वह कुछ बोल नहीं पा रहे थे।
When King Chitraketu heard how his son had died, he became almost blind. His grief grew like a burning fire due to his immense love for his son and he went to see the dead boy, falling and rolling on the ground all the way. The king reached there surrounded by his ministers and other officials and learned Brahmins and fell unconscious at the feet of the boy. His hair and clothes were disheveled. When the king regained consciousness taking a deep breath, his eyes were filled with tears and he was unable to speak.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥