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bhagavat 6.14.23: राजा चित्रकेतु ने कहा- हे महान ऋषि अंगिरा! आपकी तपस्या, ज्ञान और दिव्य समाधि के कारण आप पापपूर्ण जीवन के सभी बंधनों से मुक्त हैं। इसलिए, एक सिद्ध योगी के रूप में, आप हमारे जैसे बंधे हुए जीवों के अंदर और बाहर की हर चीज को समझ सकते हैं।   |   bhagavat अध्याय 6.14: राजा चित्रकेतु का शोक   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 14: राजा चित्रकेतु का शोक  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.14.23 
चित्रकेतुरुवाच
भगवन् किं न विदितं तपोज्ञानसमाधिभि: ।
योगिनां ध्वस्तपापानां बहिरन्त: शरीरिषु ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
राजा चित्रकेतु ने कहा- हे महान ऋषि अंगिरा! आपकी तपस्या, ज्ञान और दिव्य समाधि के कारण आप पापपूर्ण जीवन के सभी बंधनों से मुक्त हैं। इसलिए, एक सिद्ध योगी के रूप में, आप हमारे जैसे बंधे हुए जीवों के अंदर और बाहर की हर चीज को समझ सकते हैं।
 
King Citraketu said, "O great lord Angira, by austerity, knowledge and transcendental meditation you are free from all the bonds of sinful life; therefore, as a perfect yogi you can know everything inside and outside the conditioned souls like us.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)