Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.14.21: हे राजा चित्रकेतु! मुझे लग रहा है कि तुम्हारा मन प्रसन्न नहीं है। तुम अपने मन का इच्छित लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए हो। ऐसा किस कारण हुआ है यह बताओ, क्या ये तुम्हारे अपने कारण है या फिर किसी दूसरे कारण से हुआ है? तुम्हारे पीले चेहरे से तुम्हारी चिंतन की गहराई का बोध हो रहा है। | bhagavat अध्याय 6.14: राजा चित्रकेतु का शोक । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आत्मन: प्रीयते नात्मा परत: स्वत एव वा ।
लक्षयेऽलब्धकामं त्वां चिन्तया शबलं मुखम् ॥ २१ ॥
अनुवाद
हे राजा चित्रकेतु! मुझे लग रहा है कि तुम्हारा मन प्रसन्न नहीं है। तुम अपने मन का इच्छित लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए हो। ऐसा किस कारण हुआ है यह बताओ, क्या ये तुम्हारे अपने कारण है या फिर किसी दूसरे कारण से हुआ है? तुम्हारे पीले चेहरे से तुम्हारी चिंतन की गहराई का बोध हो रहा है।
O King Chitraketu! I see that your mind is not satisfied. It seems that you have not been able to achieve your desired goal. Has this happened due to your own fault or due to some other reason? Your pale face reflects your deep worry.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥