स्वामी अमात्यौ जनपदा
दुर्ग-द्रविण-संचयाः
दण्डो मित्रं च तस्यैताः
सप्त-प्रकृती मताः
एक राजा अकेला नहीं होता। पहले तो उसके पास आध्यात्मिक गुरु होता है, जो श्रेष्ठ मार्गदर्शक होता है। फिर उसके मंत्री, उसका राज्य, उसके किले, उसका खजाना, उसके कानून और व्यवस्था की व्यवस्था और उसके मित्र या सहयोगी होते हैं। यदि इन सातों को ठीक से बनाए रखा जाए, तो राजा प्रसन्न रहता है। इसी तरह, जैसा कि भगवद्-गीता में बताया गया है (देहिनो 'स्मिन् यथा देहे), जीव, आत्मा, महात-तत्व, अहंकार और पंच-तन्मात्राओं के भौतिक आवरण के भीतर है, जो इंद्रिय तृप्ति की पांच वस्तुएं हैं। जब ये सात उचित क्रम में होते हैं, तो जीव सुख के मूड में होता है। आम तौर पर जब राजा के सहयोगी शांत और आज्ञाकारी होते हैं, तो राजा खुश हो सकता है। इसलिए महान ऋषि अंगिरा ऋषि ने राजा के व्यक्तिगत स्वास्थ्य और उसके सात सहयोगियों के सौभाग्य के बारे में पूछताछ की। जब हम किसी मित्र से पूछते हैं कि सब कुछ ठीक है या नहीं, तो हम न केवल उसके व्यक्तिगत स्वयं से संबंधित होते हैं, बल्कि उसके परिवार, उसकी आय के स्रोत और उसके सहायकों या नौकरों से भी संबंधित होते हैं। उन सभी को अच्छा होना चाहिए, और तभी व्यक्ति खुश रह सकता है।
