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bhagavat 6.14.16: हे राजा परीक्षित! जब चित्रकेतु विनम्र भाव से नत होकर ऋषि के चरण-कमलों के निकट बैठ गया तो ऋषि ने उसकी विनयशीलता और उसके आतिथ्य के लिए उसे बधाई दी और उसे निम्नलिखित शब्दों से सम्बोधित किया।   |   bhagavat अध्याय 6.14: राजा चित्रकेतु का शोक   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 14: राजा चित्रकेतु का शोक  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.14.16 
महर्षिस्तमुपासीनं प्रश्रयावनतं क्षितौ ।
प्रतिपूज्य महाराज समाभाष्येदमब्रवीत् ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजा परीक्षित! जब चित्रकेतु विनम्र भाव से नत होकर ऋषि के चरण-कमलों के निकट बैठ गया तो ऋषि ने उसकी विनयशीलता और उसके आतिथ्य के लिए उसे बधाई दी और उसे निम्नलिखित शब्दों से सम्बोधित किया।
 
O King Parikshit! When Chitraketu sat down near the sage's feet with a humble bow, the sage praised him for his humility and hospitality and addressed him with the following words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)