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bhagavat 6.14.15: चित्रकेतु तुरंत सिंहासन से उठकर खड़े हो गए और उनकी पूजा की। उन्होंने पीने का पानी और खाने की चीज़ें भेंट कीं और इस तरह एक महान अतिथि के प्रति मेजबान के रूप में अपना कर्तव्य निभाया। जब ऋषि आराम से बैठ गए, तो राजा ने अपने मन और इन्द्रियों को संयम में रखकर ऋषि के चरणों के पास जमीन पर बैठ गए।   |   bhagavat अध्याय 6.14: राजा चित्रकेतु का शोक   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 14: राजा चित्रकेतु का शोक  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.14.15 
तं पूजयित्वा विधिवत्प्रत्युत्थानार्हणादिभि: ।
कृतातिथ्यमुपासीदत्सुखासीनं समाहित: ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
चित्रकेतु तुरंत सिंहासन से उठकर खड़े हो गए और उनकी पूजा की। उन्होंने पीने का पानी और खाने की चीज़ें भेंट कीं और इस तरह एक महान अतिथि के प्रति मेजबान के रूप में अपना कर्तव्य निभाया। जब ऋषि आराम से बैठ गए, तो राजा ने अपने मन और इन्द्रियों को संयम में रखकर ऋषि के चरणों के पास जमीन पर बैठ गए।
 
Chitraketu immediately rose from his throne and offered prayers to him. He offered water and food items and thus fulfilled his duty as a host to his great guest. When sage Angira had comfortably taken his seat, the king, controlling his mind and senses, sat down on the ground near the sage's feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)