येषां त्व् अन्त्गतम पापम्
जनानाम पुण्य कर्माणम्
ते द्वन्द्व मोह निर्मुक्तः
भजन्त मां दृढ़ व्रताः
"जिन्होंने पिछले जन्मों और इस जीवन में पुण्य का कार्य किया है, जिनके पापपूर्ण कर्म पूरी तरह से मिटा दिए गए हैं और जो भ्रम के द्वैत से मुक्त हैं, खुद को दृढ़ संकल्प के साथ मेरी सेवा में लगाते हैं।" चूंकि वृतासुर राक्षसों में से था, महाराज परीक्षित ने सोचा कि उसके लिए एक ऐसे महान भक्त बनना कैसे संभव हुआ।
