Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.13.22-23: इस महान आख्यान में भगवान नारायण की महिमा का गुणगान किया गया है, भक्ति योग की श्रेष्ठता के बारे में बताया गया है, इंद्र और वृत्रासुर जैसे भक्तों का वर्णन किया गया है, और राजा इंद्र के पापमय जीवन से मुक्ति पाने और राक्षसों से युद्ध में उनकी जीत के बारे में विवरण दिया गया है। इस आख्यान को समझने पर सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसलिए विद्वानों को हमेशा यही सलाह दी जाती है कि इस आख्यान को पढ़ें। जो कोई भी ऐसा करेगा, उसकी इंद्रियाँ अपने कार्यों में कुशल हो जाएंगी, उसका ऐश्वर्य बढ़ेगा और उसकी ख्याति चारों ओर फैल जाएगी। उसके सभी पापों से मुक्ति हो जाएगी, वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेगा और उसकी आयु में वृद्धि होगी। चूंकि यह आख्यान हर तरह से कल्याणकारी है, इसलिए विद्वान व्यक्ति हर शुभ उत्सव के अवसर पर इसे नियमित रूप से सुनते और दोहराते हैं। | bhagavat अध्याय 6.13: ब्रह्महत्या से पीडि़त राजा इन्द्र । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इदं महाख्यानमशेषपाप्मनांप्रक्षालनं तीर्थपदानुकीर्तनम् ।
भक्त्युच्छ्रयं भक्तजनानुवर्णनंमहेन्द्रमोक्षं विजयं मरुत्वत: ॥ २२ ॥
पठेयुराख्यानमिदं सदा बुधा:शृण्वन्त्यथो पर्वणि पर्वणीन्द्रियम् ।
धन्यं यशस्यं निखिलाघमोचनंरिपुञ्जयं स्वस्त्ययनं तथायुषम् ॥ २३ ॥
अनुवाद
इस महान आख्यान में भगवान नारायण की महिमा का गुणगान किया गया है, भक्ति योग की श्रेष्ठता के बारे में बताया गया है, इंद्र और वृत्रासुर जैसे भक्तों का वर्णन किया गया है, और राजा इंद्र के पापमय जीवन से मुक्ति पाने और राक्षसों से युद्ध में उनकी जीत के बारे में विवरण दिया गया है। इस आख्यान को समझने पर सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसलिए विद्वानों को हमेशा यही सलाह दी जाती है कि इस आख्यान को पढ़ें। जो कोई भी ऐसा करेगा, उसकी इंद्रियाँ अपने कार्यों में कुशल हो जाएंगी, उसका ऐश्वर्य बढ़ेगा और उसकी ख्याति चारों ओर फैल जाएगी। उसके सभी पापों से मुक्ति हो जाएगी, वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेगा और उसकी आयु में वृद्धि होगी। चूंकि यह आख्यान हर तरह से कल्याणकारी है, इसलिए विद्वान व्यक्ति हर शुभ उत्सव के अवसर पर इसे नियमित रूप से सुनते और दोहराते हैं।
This great story describes the glories of Lord Narayana, narrates the greatness of Bhakti Yoga, describes devotees like Indra and Vritrasura, and describes Indra's salvation from a sinful life and his victory in the battles he fought with the demons. By understanding this story one is relieved of all the consequences of sin. Therefore, learned persons are always advised to read this story. One who does so will have his senses perfected in their work, his prosperity will increase and fame will spread far and wide. All his sins will be eradicated, he will be victorious over his enemies and his life will be extended. Since this story is beneficial in every way, learned persons regularly listen to and repeat it on every auspicious festival.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध छह के अंतर्गत तेरहवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥