Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.13.21: मरिचि और अन्य महान ऋषियों ने राजा इन्द्र पर कृपा की। उन्होंने विधि-विधानपूर्वक यज्ञ सम्पन्न किया और परम व्यक्तित्व, अध्यात्म, मूल पुरुषोत्तम भगवान की पूजा की। इस प्रकार, इन्द्र ने अपनी ऊँची स्थिति फिर से प्राप्त कर ली और सभी ने उनका फिर से सम्मान किया। | bhagavat अध्याय 6.13: ब्रह्महत्या से पीडि़त राजा इन्द्र । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स वाजिमेधेन यथोदितेन
वितायमानेन मरीचिमिश्रै: ।
इष्ट्वाधियज्ञं पुरुषं पुराण-
मिन्द्रो महानास विधूतपाप: ॥ २१ ॥
अनुवाद
मरिचि और अन्य महान ऋषियों ने राजा इन्द्र पर कृपा की। उन्होंने विधि-विधानपूर्वक यज्ञ सम्पन्न किया और परम व्यक्तित्व, अध्यात्म, मूल पुरुषोत्तम भगवान की पूजा की। इस प्रकार, इन्द्र ने अपनी ऊँची स्थिति फिर से प्राप्त कर ली और सभी ने उनका फिर से सम्मान किया।
Marichi and other great sages took pity on King Indra and performed the yajna after worshipping the original person, the Supreme Being, the Supreme Personality of Godhead in the prescribed manner. Thus Indra regained his exalted position and was again respected by everyone.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥