श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 13: ब्रह्महत्या से पीडि़त राजा इन्द्र  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.13.18 
तं च ब्रह्मर्षयोऽभ्येत्य हयमेधेन भारत ।
यथावद्दीक्षञ्चक्रु: पुरुषाराधनेन ह ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन्! जब इन्द्र देवलोक पहुँच गया तो साधु-स्वभाव के ब्राह्मणों ने उसके पास जाकर उसे परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए समुचित रूप से अश्वमेध यज्ञ में दीक्षित किया।
 
O King, when Indra reached heaven, saintly Brahmins went to him and properly initiated him for the Ashwamedha Yagna to please the Supreme Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)