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bhagavat 6.13.1: श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा— हे महाराज परीक्षित! आप बहुत दानी हैं। वृत्रासुर के वध से इन्द्र को छोड़कर तीनों लोकों के देवता और सभी निवासी तुरंत प्रसन्न हो गए और उनकी सभी चिंताएँ दूर हो गईं।   |   bhagavat अध्याय 6.13: ब्रह्महत्या से पीडि़त राजा इन्द्र   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 13: ब्रह्महत्या से पीडि़त राजा इन्द्र  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.13.1 
श्रीशुक उवाच
वृत्रे हते त्रयो लोका विना शक्रेण भूरिद ।
सपाला ह्यभवन् सद्यो विज्वरा निर्वृतेन्द्रिया: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा— हे महाराज परीक्षित! आप बहुत दानी हैं। वृत्रासुर के वध से इन्द्र को छोड़कर तीनों लोकों के देवता और सभी निवासी तुरंत प्रसन्न हो गए और उनकी सभी चिंताएँ दूर हो गईं।
 
Sri Shukdev Goswami said, "Oh great donor King Parikshit! With the killing of Vritraasura, apart from Indra, all the Lokpalas and residents of the three worlds immediately became happy and all their worries vanished."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)