श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 12: वृत्रासुर की यशस्वी मृत्यु  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.12.32 
भित्त्वा वज्रेण तत्कुक्षिं निष्क्रम्य बलभिद् विभु: ।
उच्चकर्त शिर: शत्रोर्गिरिश‍ृङ्गमिवौजसा ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
बड़े ही शक्तिशाली राजा इन्द्र ने अपने वज्र से वृत्रासुर का पेट चीरकर बाहर निकल आए। बल नाम के राक्षस का वध करने वाले इन्द्र ने तुरंत उसके सिर को काट दिया, जो ऊँचाई में एक पर्वत की चोटी के बराबर था।
 
The mighty King Indra tore open the belly of Vṛtrāsura with his thunderbolt and came out. Immediately after that Indra, the slayer of the demon Bala, cut off the head of Vṛtrāsura which was as tall as a mountain peak.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)