वृत्रग्रस्तं तमालोक्य सप्रजापतय: सुरा: ।
हा कष्टमिति निर्विण्णाश्चुक्रुशु: समहर्षय: ॥ ३० ॥
अनुवाद
जब असुर ने इंद्रदेव को निगल लिया, तो ब्रह्मा, अन्य प्रजापति और अन्य महान संत अपने आप को बहुत निराश महसूस कर रहे थे। वे शोक व्यक्त करते हुए बोले, "हाय रे हाय! कितनी बड़ी विपत्ति! कितनी बड़ी विपत्ति!"।
When the Gods, Brahma and other Prajapatis and other great saints saw that the demon had swallowed Indra, they became very sad and started lamenting, saying, “Alas!” “What a great calamity!”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥