Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.12.14: चूँकि हर चीज़ भगवान् की सर्वोच्च इच्छा पर निर्भर है, इसलिए मनुष्य को यश और अपयश, जीत और हार, जीवन और मृत्यु में बराबर रहना चाहिए। खुशी और दुख के रूप में प्रस्तुत किए जाने वाले इनके प्रभावों में उसे संतुलन बनाए रखना चाहिए, बिना किसी चिंता के। | bhagavat अध्याय 6.12: वृत्रासुर की यशस्वी मृत्यु । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मादकीर्तियशसोर्जयापजययोरपि ।
सम: स्यात्सुखदु:खाभ्यां मृत्युजीवितयोस्तथा ॥ १४ ॥
अनुवाद
चूँकि हर चीज़ भगवान् की सर्वोच्च इच्छा पर निर्भर है, इसलिए मनुष्य को यश और अपयश, जीत और हार, जीवन और मृत्यु में बराबर रहना चाहिए। खुशी और दुख के रूप में प्रस्तुत किए जाने वाले इनके प्रभावों में उसे संतुलन बनाए रखना चाहिए, बिना किसी चिंता के।
Since everything is dependent on the supreme will of God, man must remain calm and maintain equanimity in fame and infamy, victory and defeat, and life and death.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥