madīyaṁ mahimānaṁ ca
parabrahmeti śabditam
vetsyasy anugṛhītaṁ me
sampraśnair vivṛtaṁ hṛdi
"चूँकि सभी कुछ मेरी ऊर्जा की ही अभिव्यक्ति है, इसीलिए मुझे परब्रह्म के नाम से जाना जाता है। इसीलिए सभी को मेरे गौरवशाली कार्यकलापों के बारे में मुझसे ही सुनना चाहिए"। प्रभु भगवद्गीता (10.2) में यह भी कहते हैं कि, "aham ādir hi devānām": "मैं सभी देवताओं का मूल स्रोत हूँ"। इसलिए परमेश्वर ही सभी का मूल स्रोत है, और कोई भी उनसे स्वतंत्र नहीं है। श्रील माधवाचार्य भी कहते हैं, anīśa jīva-rūpeṇa: सजीव anīśa होता है, वह कभी भी नियंत्रक नहीं होता है, बल्कि वह हमेशा नियंत्रित ही रहता है। इसलिए जब कोई सजीव एक स्वतंत्र ईश्वर या भगवान होने का अभिमान करता है, तो यह उसकी मूर्खता है। ऐसी मूर्खता का वर्णन निम्न पद्य में किया गया है।
