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bhagavat 6.10.5: देवताओं ने उत्तर दिया- हे ब्राह्मण! तुम जैसे पवित्र और सराहनीय काम करने वाले व्यक्ति सभी लोगों पर बहुत दयालु और प्यार करने वाले होते हैं। ऐसी पवित्र आत्माएँ दूसरों के भले के लिए क्या कुछ नहीं कर सकतीं? वे सब कुछ दे सकते हैं, यहाँ तक कि अपना शरीर भी।   |   bhagavat अध्याय 6.10: देवताओं तथा वृत्रासुर के मध्य युद्ध   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.10.5 
श्रीदेवा ऊचु:
किं नु तद् दुस्त्यजं ब्रह्मन् पुंसां भूतानुकम्पिनाम् ।
भवद्विधानां महतां पुण्यश्लोकेड्यकर्मणाम् ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
देवताओं ने उत्तर दिया- हे ब्राह्मण! तुम जैसे पवित्र और सराहनीय काम करने वाले व्यक्ति सभी लोगों पर बहुत दयालु और प्यार करने वाले होते हैं। ऐसी पवित्र आत्माएँ दूसरों के भले के लिए क्या कुछ नहीं कर सकतीं? वे सब कुछ दे सकते हैं, यहाँ तक कि अपना शरीर भी।
 
The gods replied, "O Brahman! Men like you who have pious and praiseworthy deeds are extremely kind and affectionate towards all persons. What cannot such pious souls give for charity? They can give everything, even their bodies."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)