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bhagavat 6.10.3: हे उन्नत देवताओ, मृत्यु के समय, गंभीर, असहनीय पीड़ा उन सभी जीवों की चेतना ले लेती है जिन्होंने भौतिक शरीर को स्वीकार कर लिया है। क्या तुम्हें इस पीड़ा के बारे में पता नहीं है?   |   bhagavat अध्याय 6.10: देवताओं तथा वृत्रासुर के मध्य युद्ध   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 10: देवताओं तथा वृत्रासुर के मध्य युद्ध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.10.3 
अपि वृन्दारका यूयं न जानीथ शरीरिणाम् ।
संस्थायां यस्त्वभिद्रोहो दु:सहश्चेतनापह: ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
हे उन्नत देवताओ, मृत्यु के समय, गंभीर, असहनीय पीड़ा उन सभी जीवों की चेतना ले लेती है जिन्होंने भौतिक शरीर को स्वीकार कर लिया है। क्या तुम्हें इस पीड़ा के बारे में पता नहीं है?
 
O Gods! At the time of death, due to intense and unbearable pain, all embodied souls lose their consciousness. Are you not aware of this pain?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)