श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 10: देवताओं तथा वृत्रासुर के मध्य युद्ध  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.10.29 
ते स्वप्रयासं वितथं निरीक्ष्य
हरावभक्ता हतयुद्धदर्पा: ।
पलायनायाजिमुखे विसृज्य
पतिं मनस्ते दधुरात्तसारा: ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
जब श्रीभगवान कृष्ण के अभक्त असुरों ने देखा कि युद्ध करते हुए उनके सारे प्रयास निष्फल हो रहे थे, तो उनका घमंड पूरी तरह से जाता रहा। उन्होंने अपने नेता को युद्ध शुरू होने के समय ही त्याग दिया और वहाँ से भाग निकले, क्योंकि दुश्मनों ने उनका सारा पराक्रम छीन लिया था।
 
When the demons who were non-devotees of Lord Krishna saw that all their efforts had failed, they lost all their pride in fighting the war. They decided to leave their leader at the very beginning of the battle and run away, as their enemies had taken away all their bravery.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)