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bhagavat 6.10.19-22: हजारों असुर, यक्ष, राक्षस और सुमालि और मालि के नेतृत्व वाले अन्य लोगों ने राजा इंद्र की सेनाओं का विरोध किया, जिन्हें काल भी आसानी से वश में नहीं कर सकता था । असुरों में नमुचि, शम्बर, अनर्वा, द्विमूर्धा, ऋषभ, असुर, हयग्रीव, शंकुशिर, विप्रचित्ति, अयोमुख, पुलोमा, वृषपर्वा, प्रहेति, हेति और उत्कल शामिल थे। ये अजेय असुर स्वर्णाभूषणों से सजे हुए थे और शेरों की तरह निर्भय थे । वे गदा, परिघ, बाण, प्रास, मुद्गर और तोमर जैसे हथियारों से देवताओं को पीड़ा पहुँचा रहे थे   |   bhagavat अध्याय 6.10: देवताओं तथा वृत्रासुर के मध्य युद्ध   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 10: देवताओं तथा वृत्रासुर के मध्य युद्ध  »  श्लोक 19-22
 
 
श्लोक  6.10.19-22 
नमुचि: शम्बरोऽनर्वा द्विमूर्धा ऋषभोऽसुर: ।
हयग्रीव: शङ्कुशिरा विप्रचित्तिरयोमुख: ॥ १९ ॥
पुलोमा वृषपर्वा च प्रहेतिर्हेतिरुत्कल: ।
दैतेया दानवा यक्षा रक्षांसि च सहस्रश: ॥ २० ॥
सुमालिमालिप्रमुखा: कार्तस्वरपरिच्छदा: ।
प्रतिषिध्येन्द्रसेनाग्रं मृत्योरपि दुरासदम् ॥ २१ ॥
अभ्यर्दयन्नसम्भ्रान्ता: सिंहनादेन दुर्मदा: ।
गदाभि: परिघैर्बाणै: प्रासमुद्गरतोमरै: ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
हजारों असुर, यक्ष, राक्षस और सुमालि और मालि के नेतृत्व वाले अन्य लोगों ने राजा इंद्र की सेनाओं का विरोध किया, जिन्हें काल भी आसानी से वश में नहीं कर सकता था । असुरों में नमुचि, शम्बर, अनर्वा, द्विमूर्धा, ऋषभ, असुर, हयग्रीव, शंकुशिर, विप्रचित्ति, अयोमुख, पुलोमा, वृषपर्वा, प्रहेति, हेति और उत्कल शामिल थे। ये अजेय असुर स्वर्णाभूषणों से सजे हुए थे और शेरों की तरह निर्भय थे । वे गदा, परिघ, बाण, प्रास, मुद्गर और तोमर जैसे हथियारों से देवताओं को पीड़ा पहुँचा रहे थे
 
Hundreds of thousands of Asuras, Yakshas, ​​Rakshasas (man-eaters) and others like Sumali, Mali etc. stopped the armies of King Indra, who could not be defeated even by the evil eye. The demons included Namuchi, Shambar, Anarva, Dvimurdha, Rishabh, Asura, Hayagriva, Shanku-Shira, Viprachitti, Ayomukh, Puloma, Vrishparva, Praheti, Heti and Utkala. These invincible demons, adorned with golden ornaments, were roaring as fearlessly as lions and were tormenting the gods with weapons like mace, parigha, arrows, prasas, mudgar and tomar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)