श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 1: अजामिल के जीवन का इतिहास  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  6.1.66 
यतस्ततश्चोपनिन्ये न्यायतोऽन्यायतो धनम् ।
बभारास्या: कुटुम्बिन्या: कुटुम्बं मन्दधीरयम् ॥ ६६ ॥
 
 
अनुवाद
अपनी ब्राह्मणों की कुल में जन्म लेकर भी नौकरी के बदले में उत्तेजना हासिल करने वाला वो दुष्ट, बुद्धिहीन बदमाश, जैसा-तैसा करके पैसे हासिल करता और उन्हें वेश्याओं के और उनके बच्चों के पालन-पोषण से संवारता है।
 
Although he was born in a Brahmin family, that cunning man, devoid of wisdom due to the company of a prostitute, earned money by whatever means, whether fair or foul, and spent it in the maintenance of the prostitute's sons and daughters.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)