स बद्धहृदयस्तस्मिन्नर्भके कलभाषिणि ।
निरीक्षमाणस्तल्लीलां मुमुदे जरठो भृशम् ॥ २५ ॥
अनुवाद
बालक की टूटी-फूटी भाषा और लड़खड़ाती चाल से वृद्ध अजामिल उससे बहुत ही अधिक प्रेम करता था। वह हमेशा से ही उस बालक की देखभाल करता और उसकी हरकतों का आनंद लेता।
The old Ajamil was very fond of the child because of his stammering language and faltering walk. He used to take care of the child and enjoy his games.
तात्पर्य
इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि बालक नारायण इतना छोटा था कि वह स्वयं बोल भी नहीं पाता था या ठीक से चल भी नहीं पाता था। बुजुर्ग व्यक्ति चूँकि उस बालक से बहुत ही लगाव रखता था, इसलिये वह बालक की गतिविधियों का आनंद लेता था, और चूँकि उस बालक का नाम नारायण था, उस बुजुर्ग ने सदैव नारायण का पवित्र नाम जपा। यद्यपि वह उस छोटे बालक को ही संदर्भित कर रहा था, ना कि मूल नारायण को, किन्तु नारायण का नाम इतना शक्तिशाली है कि अपने पुत्र के नाम का जाप करने मात्र से ही वह पवित्र हो रहा था (हरिर्नाम हरिर्नाम हरिर्नामेव केवलम्)। श्रील रूप गोस्वामी ने इसलिए घोषणा की कि यदि किसी का मन किसी प्रकार से कृष्ण के पवित्र नाम से आकर्षित होता है (तस्मात केनाप्य उपायेन मनः कृष्णे निवेशयेत), तो वह उस मुक्ति के मार्ग पर है। हिन्दू समाज में माता-पिता के लिए अपने बच्चों को कृष्णदास, गोविंद दास, नारायण दास और वृन्दावन दास जैसे नाम देना प्रथा है। इस प्रकार वे कृष्ण, गोविंद, नारायण और वृन्दावन नामों का जाप करते हैं और पवित्र होने का अवसर प्राप्त करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥