Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 5.9.8: पिता की मृत्यु के पश्चात जड़ भरत के नौ सौतेले भाइयों ने उसे मूर्ख और बुद्धिहीन मानकर उसके पिता की उसे पूर्ण शिक्षा देने की इच्छा को त्याग दिया। जड़ भरत के ये भाई तीनों वेदों - ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद में निपुण थे, जो कामनाओं की पूर्ति के लिए किए जाने वाले कर्मों को बहुत बढ़ावा देते हैं। किंतु ये नौ भाई ईश्वर की भक्तिमय सेवा से बिल्कुल भी परिचित नहीं थे। परिणामस्वरूप वे जड़ भरत की उच्च स्थिति को समझ नहीं पाए।   |   bhagavat अध्याय 5.9: जड़ भरत का सर्वोत्कृष्ट चरित्र   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 9: जड़ भरत का सर्वोत्कृष्ट चरित्र  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.9.8 
पितर्युपरते भ्रातर एनमतत्प्रभावविदस्त्रय्यां विद्यायामेव पर्यवसितमतयो न परविद्यायां जडमतिरिति भ्रातुरनुशासननिर्बन्धान्न्यवृत्सन्त ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
पिता की मृत्यु के पश्चात जड़ भरत के नौ सौतेले भाइयों ने उसे मूर्ख और बुद्धिहीन मानकर उसके पिता की उसे पूर्ण शिक्षा देने की इच्छा को त्याग दिया। जड़ भरत के ये भाई तीनों वेदों - ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद में निपुण थे, जो कामनाओं की पूर्ति के लिए किए जाने वाले कर्मों को बहुत बढ़ावा देते हैं। किंतु ये नौ भाई ईश्वर की भक्तिमय सेवा से बिल्कुल भी परिचित नहीं थे। परिणामस्वरूप वे जड़ भरत की उच्च स्थिति को समझ नहीं पाए।
 
After the death of his father, Jad Bharat's nine step brothers considered him stupid and unintelligent and abandoned his father's efforts to provide him with a complete education. These brothers of Jad Bharat were well versed in all three Vedas - Rig, Sama and Yajurveda, which give great encouragement to Sakaam Karma. But these nine brothers were not at all familiar with the devotional service of God. As a result, they could not understand the perfected state of Jad Bharat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)