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bhagavat 5.9.7: तत्पश्चात् ब्राह्मण की दूसरी पत्नी, अपने जुड़वां बच्चों-लड़का और लड़की को उसकी पहली पत्नी को सौंपकर, अपनी इच्छा से अपने पति के साथ मर कर, पतिलोक को चली गई।   |   bhagavat अध्याय 5.9: जड़ भरत का सर्वोत्कृष्ट चरित्र   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 9: जड़ भरत का सर्वोत्कृष्ट चरित्र  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.9.7 
अथ यवीयसी द्विजसती स्वगर्भजातं मिथुनं सपत्‍न्या उपन्यस्य स्वयमनुसंस्थया पतिलोकमगात् ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् ब्राह्मण की दूसरी पत्नी, अपने जुड़वां बच्चों-लड़का और लड़की को उसकी पहली पत्नी को सौंपकर, अपनी इच्छा से अपने पति के साथ मर कर, पतिलोक को चली गई।
 
Thereafter, the younger wife of the Brahmin handed over her twin children - a boy and a girl - to her elder co-wife and died with her husband as per her wish and went to Pati Lok (the world of husband).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)