श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 9: जड़ भरत का सर्वोत्कृष्ट चरित्र  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.9.17 
इति तेषां वृषलानां रजस्तम:प्रकृतीनां धनमदरजउत्सिक्तमनसां भगवत्कलावीरकुलं कदर्थीकृत्योत्पथेन स्वैरं विहरतां हिंसाविहाराणां कर्मातिदारुणं यद्ब्रह्मभूतस्य साक्षाद्ब्रह्मर्षिसुतस्य निर्वैरस्य सर्वभूतसुहृद: सूनायामप्यननुमतमालम्भनं तदुपलभ्य ब्रह्मतेजसातिदुर्विषहेण दन्दह्यमानेन वपुषा सहसोच्चचाट सैव देवी भद्रकाली ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
वे सभी बदमाश और चोर जिन्होंने देवी काली की पूजा का इंतजाम किया था, वे अत्यंत नीच थे और काम और अज्ञान के गुणों से बंधे थे। वे अमीर बनने की इच्छा से भरे हुए थे, इसलिए उन्होंने वेदों के आदेशों की अवहेलना की। यहां तक कि वे ब्राह्मण कुल में जन्मे स्वरूपसिद्ध जीवात्मा जड़ भरत का वध करने का प्रयास कर रहे थे। ईर्ष्या के कारण वे उन्हें देवी काली को बलि चढ़ाने के लिए लाए थे। ऐसे व्यक्ति हमेशा ईर्ष्यालु कार्यों में लगे रहते हैं, इसलिए उन्होंने जड़ भरत को मारने का साहस किया। जड़ भरत सभी जीवों के परम मित्र थे। वे किसी के भी शत्रु नहीं थे और हमेशा पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान के ध्यान में लीन रहते थे। उनका जन्म एक श्रेष्ठ ब्राह्मण कुल में हुआ था, इसलिए यदि वे किसी के शत्रु होते या आक्रामक होते तो भी उनका वध वर्जित था। किसी भी स्थिति में जड़ भरत को मारे जाने का कोई औचित्य नहीं था, इसलिए यह भद्रकाली से बर्दाश्त नहीं हुआ। वे तुरंत समझ गईं कि ये पापी डाकू ईश्वर के एक परम भक्त का वध करने वाले हैं। इसलिए अचानक मूर्ति का शरीर फट गया और साक्षात् देवी काली प्रकट हुईं। उनका शरीर प्रखर और असहनीय तेज से जल रहा था।
 
The thieves and pickpockets who had arranged for the worship of Goddess Kali were extremely mean and were bound by the qualities of rajo and tamo. They were filled with the desire to become rich, so they despised the injunctions of the Vedas. They were even ready to kill Jad Bharat, a self-realized soul born in a Brahmin family. Out of enmity, they brought him to sacrifice before Goddess Kali. Such persons are always engaged in jealous activities, that is why they could dare to kill Jad Bharat. Jad Bharat was the best friend of all living beings. He was not an enemy of anyone and was always engrossed in the meditation of the Supreme Personality of Godhead. He was born in an excellent Brahmin family, so even if he had been an enemy or aggressive, his killing was forbidden. In any case, there was no justification for killing Jad Bharat, so Bhadrakali could not tolerate it. She immediately understood that these sinful robbers were about to kill a great devotee of God. So suddenly the body of the idol was torn apart and Goddess Kali appeared. Her body was burning with intense and unbearable heat.
तात्पर्य
वैदिक निषेधों के अनुसार, केवल हमलावर को ही मारा जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति जानलेवा मंशा से आता है, तो व्यक्ति तुरंत कार्रवाई करके और आत्मरक्षा में उसे मार सकता है। यह भी कहा गया है कि यदि कोई घर में आग लगाने या किसी की पत्नी को अपवित्र करने या अपहरण करने के लिए आता है तो उसे मारा जा सकता है। भगवान रामचंद्र ने रावण के पूरे परिवार को मार डाला क्योंकि रावण ने उनकी पत्नी सीतादेवी का अपहरण किया था। हालाँकि, शास्त्रों में अन्य उद्देश्यों के लिए हत्या को मंजूरी नहीं दी गई है। देवताओं के बलिदान में जानवरों की हत्या, जो भगवान के व्यक्तित्व का विस्तार है, उन्हें मंजूरी दी जाती है जो मांस खाते हैं। यह मांसाहार का एक प्रकार का प्रतिबंध है। दूसरे शब्दों में, जानवरों का वध भी वेदों में कुछ नियमों और विनियमों द्वारा प्रतिबंधित है। इन सभी बिंदुओं पर विचार करने पर जड़ भरत को मारने का कोई कारण नहीं था, जो एक सम्मानित, उच्च ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए थे। वह एक ईश्वर-साक्षात्कारी आत्मा थे और सभी जीवित प्राणियों के हितैषी थे। वेदों ने जड़ भरत को बदमाशों और चोरों द्वारा मारे जाने की बिल्कुल भी स्वीकृति नहीं दी थी। इसके परिणामस्वरूप, देवी भद्र काली भगवान के भक्त की रक्षा के लिए देवता से प्रकट हुईं। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर बताते हैं कि जड़ भरत जैसे भक्त के ब्राह्मण तेज के कारण, देवता खंडित हो गया था। केवल जुनून और अज्ञानता के तरीकों में चोर और बदमाश और भौतिक वैभव से पागल देवी काली के सामने एक आदमी की बलि देते हैं। यह वैदिक निर्देशों द्वारा स्वीकृत नहीं है। वर्तमान में दुनिया भर में कई सैकड़ों और हजारों बूचड़खाने हैं जो भौतिक वैभव के लिए पागल आबादी द्वारा अनुरक्षित हैं। ऐसी गतिविधियों को कभी भी भागवत स्कूल द्वारा समर्थन नहीं किया जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)