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bhagavat 5.9.16: उसी वक्त, पुरोहित के तौर पर काम करने वाला एक चोर, जिसकी कल्पना में जड़ भरत एक पशु-वत् अजीब प्राणी था, के खून को भद्रकाली के लिए मदिरा की तरह पेश करने को तैयार था। इसलिए, उसने एक बहुत ही डरावनी और तेज तलवार निकाली और भद्रकाली के मंत्र से उसका जाप किया और जड़ भरत को मारने के लिए उठा लिया।   |   bhagavat अध्याय 5.9: जड़ भरत का सर्वोत्कृष्ट चरित्र   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 9: जड़ भरत का सर्वोत्कृष्ट चरित्र  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.9.16 
अथ वृषलराजपणि: पुरुषपशोरसृगासवेन देवीं भद्रकालीं यक्ष्यमाणस्तदभिमन्त्रितमसिमतिकरालनिशितमुपाददे ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
उसी वक्त, पुरोहित के तौर पर काम करने वाला एक चोर, जिसकी कल्पना में जड़ भरत एक पशु-वत् अजीब प्राणी था, के खून को भद्रकाली के लिए मदिरा की तरह पेश करने को तैयार था। इसलिए, उसने एक बहुत ही डरावनी और तेज तलवार निकाली और भद्रकाली के मंत्र से उसका जाप किया और जड़ भरत को मारने के लिए उठा लिया।
 
At that time, a thief acting as a priest was ready to offer the blood of the beast Jad-Bharat to Bhadrakali to drink. So he took out a very scary and sharp sword and after consecrating it with the mantra of Bhadrakali, he raised it to kill Jad-Bharat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)