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bhagavat 5.9.13: डाकुओं का सरदार एक नर-पशु को बलि के लिए पकड़ लेता है। लेकिन वह पशु भाग जाता है और सरदार अपने अनुयायियों को उसे खोजने भेजता है। वे अलग-अलग दिशाओं में भागते हैं पर उसे नहीं ढूंढ पाते। घने अंधेरे में आधी रात के समय इधर-उधर भटकते हुए वे एक धान के खेत में पहुँचते हैं। जहाँ उन्हें अंगिरा वंश के एक ब्राह्मणकुमार (जड़भरत) दिखाई देते हैं, जो मृग और जंगली सुअरों से खेत की रक्षा कर रहे होते हैं।   |   bhagavat अध्याय 5.9: जड़ भरत का सर्वोत्कृष्ट चरित्र   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 9: जड़ भरत का सर्वोत्कृष्ट चरित्र  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.9.13 
तस्य ह दैवमुक्तस्य पशो: पदवीं तदनुचरा: परिधावन्तो निशि निशीथसमये तमसाऽऽवृतायामनधिगतपशव आकस्मिकेन विधिना केदारान् वीरासनेन मृगवराहादिभ्य: संरक्षमाणमङ्गिर:प्रवरसुतमपश्यन् ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
डाकुओं का सरदार एक नर-पशु को बलि के लिए पकड़ लेता है। लेकिन वह पशु भाग जाता है और सरदार अपने अनुयायियों को उसे खोजने भेजता है। वे अलग-अलग दिशाओं में भागते हैं पर उसे नहीं ढूंढ पाते। घने अंधेरे में आधी रात के समय इधर-उधर भटकते हुए वे एक धान के खेत में पहुँचते हैं। जहाँ उन्हें अंगिरा वंश के एक ब्राह्मणकुमार (जड़भरत) दिखाई देते हैं, जो मृग और जंगली सुअरों से खेत की रक्षा कर रहे होते हैं।
 
The leader of the bandits caught a male animal for sacrifice, but it escaped and the leader ordered his servants to search for it. They ran in different directions but could not find it. Wandering here and there in the deep darkness of midnight, they reached a paddy field where they saw a Brahmin boy (Jadabharat) of the Angira clan sitting on a high place and guarding the field from deer and wild boars.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)