Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 5.8.3: जब वह हिरनी अगाध तृप्ति से निर्झर का जल पी रही थी, एक सिंह ने जो उसके बिलकुल पास ही था तीव्र और भयावह गर्जना की। इस गर्जना से सभी प्राणी भयभीत हो गये और उस हिरनी ने भी यह गर्जना सुनी। | bhagavat अध्याय 5.8: भरत महाराज के चरित्र का वर्णन । bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तया पेपीयमान उदके तावदेवाविदूरेण नदतो मृगपतेरुन्नादो लोकभयङ्कर उदपतत् ॥ ३ ॥
अनुवाद
जब वह हिरनी अगाध तृप्ति से निर्झर का जल पी रही थी, एक सिंह ने जो उसके बिलकुल पास ही था तीव्र और भयावह गर्जना की। इस गर्जना से सभी प्राणी भयभीत हो गये और उस हिरनी ने भी यह गर्जना सुनी।
When the deer was drinking water with great satisfaction, a lion roared loudly nearby. It was scary for all creatures and the deer also heard it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥