श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 7: राजा भरत कार्यकलाप  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.7.3 
अजनाभं नामैतद्वर्षं भारतमिति यत आरभ्य व्यपदिशन्ति ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
पहले इस ग्रह को अजनाभवर्ष के नाम से जाना जाता था, लेकिन महाराजा भरत के शासनकाल से इसे भारतवर्ष के नाम से जाना जाने लगा।
 
पहले इस ग्रह को अजनाभवर्ष के नाम से जाना जाता था, लेकिन महाराजा भरत के शासनकाल से इसे भारतवर्ष के नाम से जाना जाने लगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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