श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 7: राजा भरत कार्यकलाप  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.7.10 
यत्राश्रमपदान्युभयतोनाभिभिर्दृषच्चक्रैश्चक्रनदी नाम सरित्प्रवरा सर्वत: पवित्रीकरोति ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
पुलह आश्रम में गण्डकी नदी है जो सभी नदियों में श्रेष्ठ है। यहीं पर पवित्र शालिग्राम पत्थर (संगमरमर के कंकर) हैं जो सभी स्थानों को शुद्ध करते हैं। इन पत्थरों के ऊपर और नीचे चक्र बने हुए हैं जो नाभि की तरह दिखते हैं।
 
पुलह आश्रम में गण्डकी नदी है जो सभी नदियों में श्रेष्ठ है। यहीं पर पवित्र शालिग्राम पत्थर (संगमरमर के कंकर) हैं जो सभी स्थानों को शुद्ध करते हैं। इन पत्थरों के ऊपर और नीचे चक्र बने हुए हैं जो नाभि की तरह दिखते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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