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bhagavat 5.7.1: शुकदेव गोस्वामी ने महाराज परीक्षित से आगे कहा—हे राजा, भरत महाराज बहुत बड़े भक्त थे। अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्होंने, जिन्होंने पहले ही उन्हें सिंहासन पर बिठाने का फैसला कर लिया था, पृथ्वी पर तदनुसार राज्य करना शुरू कर दिया। पूरे विश्व पर शासन करते हुए, उन्होंने अपने पिता के आदेशों का पालन किया और विश्वरूप की पुत्री पंचजनी से विवाह किया।   |   bhagavat अध्याय 5.7: राजा भरत कार्यकलाप   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 7: राजा भरत कार्यकलाप  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.7.1 
श्रीशुक उवाच
भरतस्तु महाभागवतो यदा भगवतावनितलपरिपालनाय सञ्चिन्तितस्तदनुशासनपर: पञ्चजनीं विश्वरूपदुहितरमुपयेमे ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने महाराज परीक्षित से आगे कहा—हे राजा, भरत महाराज बहुत बड़े भक्त थे। अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्होंने, जिन्होंने पहले ही उन्हें सिंहासन पर बिठाने का फैसला कर लिया था, पृथ्वी पर तदनुसार राज्य करना शुरू कर दिया। पूरे विश्व पर शासन करते हुए, उन्होंने अपने पिता के आदेशों का पालन किया और विश्वरूप की पुत्री पंचजनी से विवाह किया।
 
Sukadeva Gosvami further told Maharaja Pariksit—O King, Maharaja Bharata was the supreme devotee. Following the orders of his father who had already decided to place him on the throne, he accordingly began to rule the earth. Ruling over the entire world, he obeyed the orders of his father and married Panchajani, the daughter of Visvarupa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)