श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 6: भगवान् ऋषभदेव के कार्यकलाप  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.6.8 
अथ समीरवेगविधूतवेणुविकर्षणजातोग्रदावानलस्तद्वनमालेलिहान: सह तेन ददाह ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
जब वह भटक रहे थे तो एक भयंकर जंगल में आग लग गई। यह आग हवा से बहते हुए बांसों की रगड़ से उत्पन्न हुई थी। इस आग में कुटकाचल का पूरा जंगल और भगवान ऋषभदेव का शरीर राख हो गया।
 
जब वह भटक रहे थे तो एक भयंकर जंगल में आग लग गई। यह आग हवा से बहते हुए बांसों की रगड़ से उत्पन्न हुई थी। इस आग में कुटकाचल का पूरा जंगल और भगवान ऋषभदेव का शरीर राख हो गया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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