श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 6: भगवान् ऋषभदेव के कार्यकलाप  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.6.4 
नित्यं ददाति कामस्यच्छिद्रं तमनु येऽरय: ।
योगिन: कृतमैत्रस्य पत्युर्जायेव पुंश्चली ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
कैसे व्यभिचारी पत्नी किसी के बहकावे में आकर अपनी इच्छाओं के आगे से कभी-कभी अपने पति का वध करा देती है। ठीक उसी प्रकार, यदि कोई योगी अपने मन पर संयम नहीं रखता है और मन को स्वतंत्र छूट दे देता है तो मन के काम, क्रोध और लोभ जैसे आगंतुकों को पनपने की सुविधा मिलेगी, जो कि निश्चय ही योगी के लिये घातक सिद्ध होंगे।
 
An adulterous woman is easily influenced by adulterous men and sometimes even gets her husband killed by them. If a yogi does not control his mind and gives it a chance, then his mind will in a way give shelter to enemies like lust, anger and greed, which will surely kill the yogi.
तात्पर्य
इस श्लोक में पुंश्चली शब्द उस स्त्री की ओर इशारा करता है जिसे पुरुष आसानी से बहका सकते हैं। ऐसी स्त्री पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए। दुर्भाग्यवश, वर्तमान युग में स्त्री कभी नियंत्रित नहीं की जाती है। शास्त्रों के निर्देशों के अनुसार स्त्रियों को स्वतंत्रता कभी नहीं दी जानी चाहिए। बच्चा होने पर स्त्री को उसके पिता द्वारा सख्ती से नियंत्रित किया जाना चाहिए। जवान होने पर उसे उसके पति द्वारा सख्ती से नियंत्रित किया जाना चाहिए और जब वह बूढ़ी हो जाती है तो उसे उसके उम्रदराज़ बेटों द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए। यदि उसे स्वतंत्रता दी जाती है और पुरुषों से अबाध मिलने-जुलने की अनुमति दी जाती है, तो उसका पतन हो जाएगा। एक पतित स्त्री, प्रेमियों द्वारा उकसाये जाने पर, अपने पति की हत्या भी कर सकती है। इस प्रकार का उदाहरण यहां इसीलिए दिया गया है क्योंकि भौतिक परिस्थितियों से मुक्त होने की इच्छा रखने वाले एक योगी को हमेशा अपने मन को नियंत्रण में रखना चाहिए। श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर कहते थे कि सुबह का हमारा पहला काम मन को जूतों से सौ बार पीटना चाहिए और सोने से पहले मन को झाड़ू से सौ बार पीटना चाहिए। इस प्रकार किसी व्यक्ति का मन नियंत्रण में रखा जा सकता है। एक अनियंत्रित मन और एक अपवित्र पत्नी एक ही हैं। एक अपवित्र पत्नी अपने पति की हत्या किसी भी समय कर सकती है और एक अनियंत्रित मन, जो वासना, क्रोध, लालच, पागलपन, ईर्ष्या और भ्रम से प्रभावित होता है, एक योगी की निश्चित रूप से हत्या कर सकता है। जब एक योगी मन द्वारा नियंत्रित होता है, तो वह भौतिक परिस्थितियों में गिर जाता है। व्यक्ति को अपने मन के प्रति काफी सावधान रहना चाहिए, जैसे एक पति को अपनी अपवित्र पत्नी के प्रति सावधान रहना होता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)