श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 6: भगवान् ऋषभदेव के कार्यकलाप  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.6.3 
तथा चोक्तम्—
न कुर्यात्कर्हिचित्सख्यं मनसि ह्यनवस्थिते ।
यद्विश्रम्भाच्चिराच्चीर्णं चस्कन्द तप ऐश्वरम् ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
सभी विद्वानों ने अपनी-अपनी राय व्यक्त की है। मन स्वभाव से बेहद चंचल है। मनुष्य को चाहिए कि वो इससे मित्रता न करे। अगर हम मन पर पूरा भरोसा करें, तो यह किसी भी पल धोखा दे सकता है। यहाँ तक कि शिवजी श्रीकृष्ण के मोहिनी रूप को देखकर उत्तेजित हो उठे और सौभरि मुनि भी योग की सिद्धावस्था से गिर गए।
 
All the scholars have expressed their views. The mind is very fickle by nature. Man should not befriend it. If we trust the mind completely, it can deceive us any moment. Even Lord Shiva got excited after seeing the enchanting form of Lord Krishna and Saubhari Muni also lost his state of yoga.
तात्पर्य
आध्यात्मिक जीवन में प्रगति करने के लिए पहला व्यापार मन और इंद्रियों को नियंत्रित करना है। जैसे कि भगवद-गीता (15.7) में श्री कृष्ण कहते हैं:

mamaivāṁśo jīva-loke

jīva-bhūtaḥ sanātanaḥ

manaḥ ṣaṣṭhānīndriyāṇi

prakṛti-sthāni karṣati

यद्यपि जीवित प्राणी परम प्रभु का अभिन्न अंग है और इसलिए एक दिव्य स्थिति में हैं, वे अभी भी इस भौतिक दुनिया में पीड़ित हैं और मन और इंद्रियों के कारण अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अस्तित्व के लिए इस झूठे संघर्ष से बाहर निकलने और भौतिक दुनिया में खुश रहने के लिए, किसी को मन और इंद्रियों को नियंत्रित करना होगा और भौतिक परिस्थितियों से अलग होना होगा। किसी को कभी तपस्या और तपस्या की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए; हमेशा उन्हें करना चाहिए। भगवान ऋषभदेव ने व्यक्तिगत रूप से हमें दिखाया कि यह कैसे करना है। श्रीमद-भागवतम (9.19.17) में विशेष रूप से कहा गया है:

mātrā svasrā duhitrā vā

nāviviktāsano bhavet

balavān indriya-grāmo

vidvāṁsam api karṣati

एक गृहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यासी और ब्रह्मचारी को महिलाओं से जुड़ते समय बहुत सावधान रहना चाहिए। किसी को भी अपनी माँ, बहन या बेटी के साथ एकान्त स्थान पर बैठना मना है। हमारे कृष्ण चेतना आंदोलन में हमारे समाज में महिलाओं से खुद को अलग करना बहुत मुश्किल रहा है, खासकर पश्चिमी देशों में। इसलिए कभी-कभी हमारी आलोचना की जाती है, लेकिन फिर भी हम हर किसी को हरे कृष्ण महा-मंत्र का जाप करने और इस तरह आध्यात्मिक रूप से प्रगति करने का मौका देने की कोशिश कर रहे हैं। अगर हम हरे कृष्ण महा-मंत्र का अपमान किए बिना जाप करने के सिद्धांत पर टिके हुए हैं, तो, श्रील हरिदास ठाकुर की कृपा से, हम महिलाओं के आकर्षण से बच सकते हैं। हालाँकि, अगर हम हरे कृष्ण महा-मंत्र का जाप करने में बहुत सख्त नहीं हैं, तो हम किसी भी समय महिलाओं का शिकार हो सकते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)