अहो नु वंशो यशसावदात:
प्रैयव्रतो यत्र पुमान् पुराण: ।
कृतावतार: पुरुष: स आद्य-
श्चचार धर्मं यदकर्महेतुम् ॥ १४ ॥
अनुवाद
"ओह! मैं प्रियव्रत के उस वंश के बारे में क्या कह सकता हूं जो इतना शुद्ध और प्रसिद्ध है। इसी वंश में भगवान विष्णु ने अवतार लिया और धार्मिक सिद्धांतों का पालन किया, जो लोगों को उनके कर्मों के परिणामों से मुक्त कर सकते हैं।"
“Oh! What can I say about Priyavrata’s lineage which is so pure and extremely famous. In this lineage itself, the Supreme Being God took incarnation and followed the religious rules that liberate one from the consequences of karma.”
तात्पर्य
मानव समाज में बहुत से वंश होते हैं जिनमें सर्वोच्च प्रभु अवतार के रूप में अवतरित होते हैं। भगवान कृष्ण यदु वंश में प्रकट हुए, और भगवान रामचंद्र इक्ष्वाकु, या रघु वंश में प्रकट हुए। इसी प्रकार, भगवान ऋषभदेव राजा प्रियव्रत के वंश में प्रकट हुए। ये सभी वंश बहुत प्रसिद्ध हैं, और उनमें से प्रियव्रत का वंश सबसे प्रसिद्ध है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥