श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 6: भगवान् ऋषभदेव के कार्यकलाप  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.6.11 
ते च ह्यर्वाक्तनया निजलोकयात्रयान्धपरम्परयाऽऽश्वस्तास्तमस्यन्धे स्वयमेव प्रपतिष्यन्ति ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
शिक्षा के अभाव के कारण, निचली जाति के लोग वैदिक सिद्धांतों से हटकर एक धार्मिक प्रथा का निर्माण करते हैं। अपने मनगढ़ंत विचारों के कारण वे स्वयं ही गहन अंधकार में गिर जाते हैं।
 
Due to their ignorance, lowly people start religious systems that deviate from Vedic rules. They themselves fall into deep darkness because of their mental hypocrisy.
तात्पर्य
इस संदर्भ में, भगवद्-गीता के अध्याय सोलह को देखा जा सकता है, जहाँ असुरों के पतन का विवरण दिया गया है (16.16 और 16.23)।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)