श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 4: भगवान् ऋषभदेव के लक्षण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.4.9 
येषां खलु महायोगी भरतो ज्येष्ठ: श्रेष्ठगुण आसीद्येनेदं वर्षं भारतमिति व्यपदिशन्ति ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
ऋषभदेव के सौ पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र का नाम भरत था, जो श्रेष्ठ गुणों से सम्पन्न महान् भक्त था। उनके सम्मान में इस ग्रह को भारतवर्ष के नाम से जाना जाता है।
 
Out of the hundred sons of Rishabhdev, the eldest son was named Bharat, who was a great devotee endowed with great virtues. In his honour this world is called Bharatvarsh.
तात्पर्य
हिमावत पर्वत से कन्याकुमारी कैप तक फैली पवित्र भूमि भारत वर्ष कहलाई जाती है। इसे पुण्यभूमि भी कहते हैं। इस भारत भूमि या भारत वर्ष को श्री चैतन्य महाप्रभु ने विशिष्ट गौरव प्रदान किया है।

भारत भूमि पर जन्मिनो मानुष

जनम सार्थक करतों परोपकार

भारत भूमि में मनुष्य रूप में जन्म लेने वाले पुरुषों को अपने जीवन को सार्थक बनाकर दूसरों का उपकार करना चाहिए। जो लोग इस भूमि पर निवास करते हैं, वे अति भाग्यशाली हैं। वे कृष्णभावनामृत आंदोलन को स्वीकार करके अपने जीवन को पवित्र बना सकते हैं। फिर उन्हें भारत भूमि छोड़कर विश्व के कल्याण के लिए इस पंथ का प्रचार करना चाहिए।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)