**श्रुति-स्मृति-पुराणादि
पंचरात्रा-विधिं विना
एकांतिकी हरि भक्ती
उत्पातायैव कल्पते**
मानव समाज को श्रुति और स्मृति, वैदिक साहित्य से प्राप्त निर्देशों का पालन करना चाहिए। व्यावहारिक रूप से जीवन में लागू यह पंचरात्रिका-विधि के अनुसार भगवान की सर्वोच्च व्यक्तित्व की पूजा है। हर मनुष्य को अपने आध्यात्मिक जीवन को आगे बढ़ाना चाहिए और अंत में घर वापस, भगवान के पास लौटना चाहिए। महाराज ऋषभदेव ने इन सभी सिद्धांतों का सख्ती से पालन किया। वह एक आदर्श गृहस्थ बने रहे और अपने पुत्रों को सिखाया कि कैसे आध्यात्मिक जीवन में पूर्ण बनना है। ये कुछ उदाहरण हैं कि कैसे उन्होंने पृथ्वी पर शासन किया और अवतार के रूप में अपना मिशन पूरा किया।
