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bhagavat 5.4.10: भारत के अतिरिक्त, उनके 99 अन्य पुत्र भी थे। इनमें से नौ बड़े पुत्रों के नाम थे- कुशावर्त, इलावर्त, ब्रह्मावर्त, मलय, केतु, भद्रसेन, इंद्रस्पृक, विदर्भ और कीकट।   |   bhagavat अध्याय 5.4: भगवान् ऋषभदेव के लक्षण   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 4: भगवान् ऋषभदेव के लक्षण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.4.10 
तमनु कुशावर्त इलावर्तो ब्रह्मावर्तो मलय: केतुर्भद्रसेन इन्द्रस्पृग्विदर्भ: कीकट इति नव नवति प्रधाना: ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
भारत के अतिरिक्त, उनके 99 अन्य पुत्र भी थे। इनमें से नौ बड़े पुत्रों के नाम थे- कुशावर्त, इलावर्त, ब्रह्मावर्त, मलय, केतु, भद्रसेन, इंद्रस्पृक, विदर्भ और कीकट।
 
Apart from Bharat, he had ninety-nine more sons. The names of these nine elder sons were Kushavarta, Ilavarta, Brahmavarta, Malaya, Ketu, Bhadrasen, Indrasprik, Vidarbha and Keekata.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)