श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 3: राजा नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ से ऋषभदेव का जन्म  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.3.9 
तद्यथा बालिशानां स्वयमात्मन: श्रेय: परमविदुषां परमपरमपुरुष प्रकर्षकरुणया स्वमहिमानं चापवर्गाख्यमुपकल्पयिष्यन् स्वयं नापचित एवेतरवदिहोपलक्षित: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
हे ईशाधश, हम धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थों से अनजान हैं। हमें जीवन का लक्ष्य ठीक से नहीं पता है। आप हमारे सामने ऐसे प्रकट हुए हैं जैसे कोई व्यक्ति अपनी पूजा कराने के लिए जानबूझकर आया हो। लेकिन ऐसा नहीं है। आप तो इसलिए प्रकट हुए हैं जिससे हम आपके दर्शन कर सकें। आप अपनी अगाध और अकारण कृपा से हमारा उद्देश्य पूरा करने, हमारा हित करने और हमें अपवर्ग का लाभ प्रदान करने के लिए प्रकट हुए हैं। हम अपनी अज्ञानता के कारण आपकी ठीक से पूजा भी नहीं कर पा रहे हैं, तो भी आप पधारे हैं।
 
O Ishadhasha, we are completely ignorant of Dharma, Artha, Kama and Moksha because we do not know the goal of life properly. You have appeared here in front of us as if a person has come deliberately to get himself worshipped. But it is not so, you have appeared so that we can see you. You have appeared out of your infinite and causeless compassion to fulfill our purpose, to do good to us and to give us the benefit of salvation. Due to our ignorance we are not even able to worship you properly, yet you have come.
तात्पर्य
भगवान विष्णु यज्ञभूमि में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें अपने व्यक्तिगत हित में कोई रुचि थी। इसी तरह मंदिर में आराध्य देवता की प्रतिमा भी उसी उद्देश्य से मौजूद है। दयामय भगवान हमारे सामने आते हैं, ताकि हम उन्हें देख सकें। चूँकि हमारे पास कोई अलौकिक दृष्टि नहीं है, इसलिए हम प्रभु की आध्यात्मिक सच्चिदानंद-विग्रह नहीं देख सकते हैं; इसलिए अपनी दया से, वे ऐसे रूप में आते हैं जिसे हम देख सकते हैं। हम केवल पत्थर और लकड़ी जैसी भौतिक चीजों को देख सकते हैं, और इसलिए वह पत्थर और लकड़ी का रूप धारण करते हैं और इस तरह मंदिर में हमारी सेवा स्वीकार करते हैं। यह भगवान की दया का प्रकटीकरण है। यद्यपि उनकी ऐसी बातों में कोई रुचि नहीं है, लेकिन हमारी प्रेमपूर्ण सेवा प्राप्त करने के लिए वह कार्य करने को सहमत होते हैं जैसा कि वह करते हैं। हम वास्तव में प्रभु की पूजा के लिए उपयुक्त सामग्री नहीं चढ़ा सकते क्योंकि हम पूरी तरह से अज्ञानी हैं। यह उनकी दया से ही है कि भगवान महाराज नाभि के यज्ञभूमि में प्रकट हुए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)